तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा जीते गए विश्वास मत में कथित खरीद-फरोख्त और भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई जांच की मांग की गई। याचिका में कहा गया है कि जब तक जांच न पूरी हो जाए, तब तक तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू रहे।
यह पीआईएल चेन्नई के रहने वाले केके रमेश ने दायर की है। इसमें उन्होंने विजय के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है। याचिका में भारत संघ, सीबीआई और तमिलनाडु सरकार को पक्षकार बनाया गया है। अर्जी में कहा गया है कि तमिलनाडु में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन उसके पास पर्याप्त नंबर नहीं थे, जिससे एक स्थिर सरकार बन सके।
याचिका में कहा गया कि विधानसभा में लोकतांत्रिक तरीके से फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ और विधायकों को काफी पैसे दिए गए। उनके साथ समझौते किए गए। कहा गया, ''दूसरे दल के कुछ विधायकों ने पैसों और दूसरे फायदे के लिए पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया।''यह एआईएडीएमके विधायकों के लिए कहा गया है, क्योंकि 25 विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन करते हुए टीवीके को वोट दिया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि चूंकि यह सबकुछ गैर कानूनी तरीके से हुए, इसलिए विधानसभा को भंग करके मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए।
बता दें कि चार मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए थे, जिसमें पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही विजय की पार्टी टीवीके ने चौंका दिया था। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनते हुए 108 सीटें जीती थीं। इसके बाद, कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी दलों ने समर्थन देने का ऐलान किया, जिसके बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इसके बाद जब तमिलनाडु विधानसभा में विजय ने बहुमत साबित किया तो सभी हैरान रह गए। दरअसल, एआईएमडीएके में बड़ी फूट देखने को मिली और 25 विधायकों ने टीवीके को समर्थन दे दिया। इसकी मदद से टीवीके गठबंधन को 144 का आंकड़ा हासिल कर लिया, जिससे बहुमत साबित करने में काफी आसानी हुई।
मंत्रिमंडल में शामिल होने को आमंत्रित किया
वहीं, तमिलनाडु के लोक निर्माण एवं खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने बुधवार को कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय चाहते हैं कि मंत्रिमंडल कांग्रेस, वीसीके, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और आईयूएमएल जैसी पार्टियों के साथ "एक परिवार" की तरह काम करे, जिन्होंने सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। अर्जुन ने आरोप लगाया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने सत्ता में आने के लिए आपस में गठबंधन करके टीवीके को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश की है।
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